नेहरू मेमोरियल का प्रधानमंत्रीकरण धनतांत्रिक साजिश -डॉ0 शर्मा

 

 


प्रकल्प की विरोधाभासी प्रभावकारिता पर मंथन

मथुरा में नेहरू मेमोरियल पुनर्स्थापना  की माँग




मथुरा,

     प्रधानमंत्रित्वसर्जक पण्डित जवाहरलाल नेहरू के निवास एवं महाप्रयाण स्थल नई दिल्ली क्षेत्र अन्तर्गत तीनमूर्ति परिसर स्थित नेहरू मेमोरियल के प्रधानमंत्रीकरण में निर्माणाधीन संग्रहालय इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि प्रजातंत्र की हत्या में संघर्षरत धनतंत्र 67 साल बाद कामयाब हुआ है।

यह आरोप प्रथम भारतीय प्रधान मंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू के 131वें जन्मदिवस 14 नवम्बर को डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में गणेशधाम कॉलोनी स्थित प्रकल्प परिसर में आयोजित ‘73 वर्षाें के भारतीय प्रधान मंत्रीः जितने जवाहरलाल उससे ज्यादा नटवरलाल’ खुला मंच में लगाया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं गांधी, नेहरू शास्त्री समेत इन्दिराई स्मारकों की वैश्विक प्रस्थापना के प्रस्तावक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने प्रत्यारोप लगाया कि नेहरू मेमोरियल के जबरिया प्रधानमंत्रीकरण पर उठे राष्ट्रीय एवम् अन्तरराष्ट्रीय सवालों की अनदेखी साफ बयाँ कर रही है कि प्रजातंत्र और पूँजीतंत्र की रस्साकशी बीच विभाजित मुल्क में महात्मा गांधी, इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी की निर्मम हत्या के पीछे धनतंत्र सक्रिय रहा है और 67 वर्षाें के दुस्साहसी संघर्ष बाद उसे कामयाबी हासिल हुई है। कहा कि साम्राज्यवाद के बरखिलाफ पूरी दुनिया में उठी आवाजें धनतंत्र के साये में सुला दी गई हैं और अब शोषण के बजाय आदमखोर युग की शुरूआत हुई है जिसकी गवाही में महज आँखों के लिए मथुरा में बच्चों की निर्मम हत्या एवं छद्म कोरोना रोगियों की गुमशुदा लाशें दे रही हैं।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि धनतंत्र के शिकंजे में कैद विश्व अस्तित्व को कराह रहा है और नौबत धरती के अनमोल रत्न वायु, जल एवम् अन्न पर बन आई है। आगे कहा कि प्रकृति विरोधी नई व्यवस्था ने आम आदमी का हक ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों, जीव-जन्तुओं सभी का जीवन अधिकार छीन लिया है। कहा कि कोरोना के नाम पर सावधानी की हिदायतें सिर्फ और सिर्फ गरीबों को सताने का बहाना थी और उनकी आड़ में अरबों-खरबों का आर्थिक लाभ उठाया गया है। कहा कि भूतपूर्व प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी द्वारा लागू नसबन्दी  फिर भी स्वर्णिम भविष्य से प्रभावित थी। मगर कोरोनाबन्दी नोटबन्दी बाद उठा दूसरा तुगलकी कदम जान पड़ा है जिसका सबसे बुरा असर गैरभाजपाई सूबों में दिखाई दिया है।

डॉ0 शर्मा ने क्षोभ जताया कि निर्माणाधीन संग्रहालय से राष्ट्रमण्डलीय समेत नेहरूआनी विरासत के विध्वंश की जो अपूर्णनीय क्षति होगी उसकी भरपाई तो सदियों तक नहीं हो सकेगी। मगर भविष्य में संग्रहालय से यह इतिहास जरूर करवट लेगा कि आजाद हिन्दुस्तान के प्रधान मंत्री कितने जवाहरलाल और कितने नटवरलाल सिद्ध हुए? कहा कि प्रभावित निर्माणाधीन प्रकल्प से पदेन मृत्यु के गांधी, नेहरू, शास्त्री समेत इन्दिराई स्मारकों की वैश्विक प्रस्थापना बेशक कमजोर होगी किन्तु नटवरलालों की कालिख में जवाहरलाल प्रधानमंत्रियों का गौरव रौशन होता जायेगा। कहा कि हिन्दुत्व के नाम पर फैलता निपट मायावाद राष्ट्रमूलक अस्मिताओं को ढहाता जा रहा है और राष्ट्रोत्थान के जरूरी सवाल स्वच्छ भारत में समेटे जा रहे हैं। कहा कि दलित वोट बैंक के चुम्बक स्वच्छ भारत में फलता-फूलता शौचालयवाद मायावाद की शुद्ध मवाद है जो भाजपाई गंगा की पैदाइशी गंगोत्री रही है। जिसके चलते महात्मा गांधी की निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया।

डॉ0 शर्मा ने नेहरू मेमोरियल के प्रधानमंत्रीकरण पर मथुरा में नये मेमोरियल की माँग की। कहा कि दुनिया को यह बताने का समय आ गया है कि विश्व शान्ति संवाहक प्रथम भारतीय प्रधान मंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू 14 नवम्बर 1889 को उस धार्मिक अनुष्ठान के फलस्वरूप प्रयाग में जन्मे थे जिसे उनके माता-पिता ने मथुरा में पुरोहित बनकली चौबे के सान्निध्य में सम्पन्न किया था। तदनुसार मनौती के उपलक्ष्य में विश्रामघाट क्षेत्र स्थित गोवर्द्धननाथ मन्दिर और मारू गली क्षेत्र में कश्मीरी धर्मशाला का निर्माण अग्रज बंशीधर नेहरू व मुंशी मुबारक अली की देखरेख में कराया गया था। आगे कहा कि समाजवादी चिंतन के चलते शायद पण्डित जवाहरलाल नेहरू स्वयं निजी इतिहास की सच्चाई छिपाते रहे। मगर आज उससे विश्व को अवगत कराने की जरूरत है। कहा कि संस्थान की शोध परियोजनाओं के मुताबिक महात्मा गांधी के अगर स्वामी विरजानन्द का अवतरण मानें तो देश के इतिहास में गांधी-नेहरू दोनों पर मथुरा की आध्यात्मिक चेतना का असर स्वीकार करने से रोका नहीं जा सकेगा। फिर चाहे महात्मा गांधी की मथुरा में प्रथम भारतीय गिरफ्तारी हो या वस्त्र त्याग या फिर नेहरू का विश्व पटल पर फैलाव, कृष्ण चेतना जीवनपर्यन्त दोनों का साया बनती रही। 

इससे पूर्व उपस्थितों ने पण्डित जवाहरलाल नेहरू के चित्रपट पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल भारत माता व मां यमुना के जयकारों एवं ‘जब तक सूरज चाँद रहेगा पण्डित जवाहरलाल नेहरू का नाम रहेगा’ ‘पण्डित जवाहरलाल नेहरू अमर रहें’ नारों से गूँज उठा।

इस अवसर पर अंशू, आयुशी, हिमांशू, हिमानी, भारती उपस्थित थे।     

     नेहरू मेमोरियल का प्रधानमंत्रीकरण धनतांत्रिक साजिश -डॉ0 शर्मा

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Beena Budki

8 Feb 2021, 14:22 (2 days ago)
to me
 आदरणीय डॉ शर्मा
सार्थक और सटीक कोशिश साधुवाद 
सूचित करने के लिए धन्यवाद
बीना बु द की

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