गांधी उपेक्षक दीनदयालीकरण रेलवे पर कलंक-डॉ0 शर्मा

 

गांधी की उपेक्षित पहली भारतीय गिरफ्तारी पर रोष

रौलट विरोधी गांधी सप्ताह के अन्तर्गत आयोजन

मथुरा,



      आजादी की सनसनी विश्ववंद्य विश्वात्मा महात्मा गांधी की 9 अप्रैल 1919 के दिन मथुरा में पहली भारतीय गिरफ्तारी की 103 वर्षाें से अनवरत उपेक्षा के बावजूद रेल विरासत का बलात  हस्तक्षेपी दीनदयालीकरण आजादी के अमृतमय महोत्सव वर्ष समेत 16वीं व 17वीं लोकसभा सरकारों की कार्यप्रणाली पर कलंक है। 



यह आरोप महात्मा गांधी की मथुरा में पहली भारतीय गिरफ्तारी की 103वीं वर्षगांठ पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में रौलट विरोधी गांधी सप्ताह के अन्तर्गत 9 अप्रैल को जंक्शन स्टेशन पर आयोजित यादगार कार्यक्रम में दोहराया गया।



संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं रौलट विरोधी गांधी सप्ताह समेत महात्मा गांधी की मथुरा में पहली भारतीय गिरफ्तारी के अन्वेषक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने रोष जताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पूरी दुनिया में भारत के बराबर मजाक नहीं उड़ाया गया। आगे कहा कि गांधी जयन्ती के 150वें वर्ष उद्घाटित पहली भारतीय गिरफ्तारी पर सरकार के कान नहीं खड़े हुए। नतीजन नया खुलासा आजादी के अमृतमय महोत्सव तक पाठ्य पुस्तकों का अंग नहीं बनाया गया। कहा कि गांधी का रौलट विरोध अखण्ड भारत का पहला और अन्तिम कामयाब आन्दोलन था जिसके चलते महात्मा गांधी के आह्वान पर 6 अप्रैल 1919 की अभूतपूर्व भारतबन्दी ने ब्रिटिश हुकूमत को न केवल हिला दिया बल्कि पूरी दुनिया को आजादी हासिल करने की नई रोशनी दी थी। और भावी इतिहास की दो हस्तियां महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना की आवाज रौलट विरोध में खिलाफत के बाद बंबई की फ्रेंच ब्रिज मीटिंग में एक ही मंच से बुलंद हुई थी। और उस पर अमल करने के लिए उस जमाने में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग इकट्ठे हुए थे। फिर उस आवाज के दमन में 13 अप्रैल 1919 को जलियांवालाबाग काण्ड को अंजाम दिया गया। कहा कि जलियांवालाबाग काण्ड के सौ साल बाद वर्ष 2019 में पाकिस्तान के उत्साही प्रधान मंत्री इमरान खान ने हादसे के जिम्मेदार ब्रिटेन से माफी मांगने की मार्मिक अपील करके बाजी मार ली और बांग्लादेश समेत भारतीय प्रधान मंत्री गफलत में अवसर चूक गये। और तो और मथुरा में जलियांवालाबाग पर संस्थान के रौलट विरोधी गांधी सप्ताह आयोजन से कांग्रेस ने फायदा उठाया और राहुल-प्रियंका झट नई दिल्ली के राजघाट क्षेत्र स्थित गांधी समाधि पर फूल-मालाओं के साथ हाजिर हो गये। मगर भारतीय प्रधान मंत्री को तब भी भूल का अहसास नहीं हुआ। फिर जब संस्थान द्वारा राष्ट्रपिता की पहली भारतीय गिरफ्तारी पर मथुरा जंक्शन स्टेशन क्षेत्र में स्मारक की मांग उठाई जा रही है तो सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है।



डॉ0 शर्मा ने बताया कि 1919 के रौलट विरोध में दिल्ली और अमृतसर में शांति स्थापना के लिए बंबई से रेलयात्रा पर निकले महात्मा गांधी के 9 अप्रैल की शाम मथुरा पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया था। तत्पश्चात् जब बीबीसीआई नार्दर्न एक्सप्रेस कोसीकलाँ स्टेशन पहुंची तो उन्हें अंग्रेज पुलिस अफसर ने पंजाब गवर्नमेंट का वह आदेश थमा दिया जिसमें उन्हें पंजाब में प्रवेश करने से मना किया गया था। कहा कि जब गांधी ने पंजाब सरकार के आदेश की अवहेलना की और तत्कालीन पंजाब के इलाके पलवल में दाखिल  हो गये तो पलवल स्टेशन पर पूर्व से मौजूद दूसरे पुलिस अफसर ने उन्हें केन्द्र समेत दिल्ली सरकार के दो और प्रवेश मनाही के आदेश दिखाकर गिरफ्तार कर लिया। कहा कि चूंकि उस जमाने में पलवल स्टेशन और गांव में रूकने की कोई व्यवस्था नहीं थी। लिहाजा महात्मा गांधी को 9 अप्रैल की रात वापस मथुरा लाया गया और सराय स्थित मौजूदा रिजर्व पुलिस लाइन क्षेत्र में हिरासत में रखा गया। उसके अगले दिन उन्हें सुबह 6 बजे लौटती बीबीसीआई नार्दर्न एक्सप्रेस से वापस बंबई रवाना किया गया। कहा कि मथुरा में महात्मा गांधी की गिरफ्तारी की खबर मिलने पर 12 अप्रैल को दस हजार लोगों ने जुलूस में विरोध प्रदर्शन किया था।



डॉ0 शर्मा ने खेद जताया कि रौलट विरोध के बाद ही विखण्डन और अलगाव का बीजारोपण किया गया और भारतीय आन्दोलन के तौर-तरीकों से आशान्वित वैश्विक समुदाय सुख शान्ति के बजाय ़त्रासद अन्त पर रो उठा। कहा कि अब समय आ गया है कि जब भावी पीढ़ी को भारतीय आन्दोलन में अन्तर्निहित शान्ति व समता का पाठ पढ़ाया जाये और यह तभी संभव होगा जब 1919 से पूर्व के भारत की सच्ची तस्वीर देश के सामने पेश की जाये। फिर जब महात्मा गांधी की पहली भारतीय गिरफ्तारी के रूप में अखण्ड भारत के पुर्नगठित होने की दुर्लभ कड़ी मौजूद है तो उसे क्यों न विश्व विरासत का विषय बनाया जाये?






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