दीनदयाल के पैदाइश की विरासत को न दें सजा- डॉ0 शर्मा

दीनदयाल के पैदाइश की विरासत को न दें सजा- डॉ0 शर्मा अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद नामित वेटरीनरी विश्वविद्यालय समेत फरह रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन पर रोष संग्रहालय चौक क्षेत्र में स्थापित करें भारतीयता सर्जक एफ0 एस0 ग्राउज की मूर्ति मथुरा को भेंट करें दीनदयाल नामित अन्तरराष्ट्रीय मानववाद विश्वविद्यालय मथुरा, सामान्य जनजीवन से लेकर विश्वस्तरीय समस्याओं के समाधान की अद्भुत मेधाशक्ति और उसकी बुनियाद पर हासिल बौैद्धिक उपलब्धियों के दौर में बलिदान हुए भारतमाता के दुर्भाग्यशाली सपूत एकात्म मानववाद प्रणेता पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की पवित्रात्मा पर उस वक्त क्या न बीती होगी, जब उनकी जन्म शताब्दी के वर्ष, उन्हीं की जन्मस्थली पर जखनबाग और जलियांवालाबाग को ताख पर रखकर बर्बरता की नई मिसाल कायम करते जवाहरबाग में मानवता का नृशंस संहार किया, कराया और करने दिया गया। उसी सिलसिले में छटपटाहट तब तो और बढ़ी होगी जब महज राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए राष्ट्रनायक की जन्मस्थली में दर्ज भारतमाता के अमर सपूत शहीद चन्द्रशेखर आजाद नामित वेटरीनरी विश्वविद्यालय और भारतविद्या के अनन्य उपासक, श्रीरामचरितमानस के मौलिक अंग्रेजी अनुवादक, विश्वविख्यात मथुरा संग्रहालय के संस्थापक एवम्् आधुनिक मथुरा के निर्माता तत्कालीन कलेक्टर फ्रेडरिक सिल्वन ग्राउज समेत ऐतिहासिक युद्धों और एवं पौराणिक कथानकांे के साक्षी फरह रेलवे स्टेशन की प्रासंगिकता का उनके नाम पर हनन किया गया। यह आक्रोश डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में गणेशधाम कॉलोनी स्थित संस्थान की रविवासरीय बैठक में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली की यादगार में मौजूदा सरकार द्वारा जारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्मृतियों के हनन पर व्यक्त किया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं चन्द्रशेखर आजाद समेत ग्राउज स्मृतियों के उन्नायक तथा पण्डित दीनदयाल उपाध्याय अन्तरराष्ट्रीय मानववाद विश्वविद्यालय के प्रस्तावक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महज राजनीतिक स्वार्थों के मद्देनजर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली नगला चन्द्रभान को लक्ष्य बनाकर तीर्थनगरी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में विष वपन कर रही है। आगे कहा कि वेटरीनरी विश्वविद्यालय को चन्द्रशेखर आजाद नामित रहने देने और संग्रहालय चौक कम-से-कम एफ0 एस0 ग्राउज की मूर्ति स्थापना से ज्यादा प्रासंगिक बन सकते थे। मगर सत्ता के लोभ में सिरफिरों ने जनपद के सांस्कृतिक महत्व को नजरअन्दाज करते हुए दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति स्थापित कर दिव्यात्मा के उच्च आदर्शों का दमन किया है। डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि आजादी के 70 वर्षों से उपेक्षित राष्ट्रनायक के व्यक्तित्व के प्रचार-प्रसार और व्यवहार के लिए विशिष्ट विश्वविद्यालय की संभावना पर विचार किया जा सकता था। मगर क्षुद्र चिंतन और संकीर्ण विचारणा के चलते महामानव की सार्वभौमिक देशना का उनकी ही जन्मस्थली में गला घोंट दिया गया। डॉ0 शर्मा ने प्रधान मंत्री से पण्डित दीनदयाल उपाध्याय को विवादों से मुक्त रखते हुए उनके नाम पर मथुरा में अन्तरराष्ट्रीय मानववाद विश्वविद्यालय स्थापित करने की माँग की। कहा कि मनुष्यता आज उस मुकाम पर आ पहुँची है जहाँ एकात्म मानववाद के चिंतन, मनन और अनुशीलन के बगैर उसका अस्तित्व सुरक्षित रह पाना नामुमकिन होने लगा है। ऐसे हालातों में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित मानववादी चिंतन विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है और उसके उद्घोष के मद्देनजर अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सर्वधर्म समन्वय की नगरी मथुरा के अतिरिक्त दूसरी उपयुक्त जगह और कोई नहीं होगी। डॉ0 शर्मा ने हवाला दिया कि 42 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी द्वारा मथुरा रिफाइनरी की स्थापना के बाद से क्षेत्र में वैसे भी कोई राष्ट्रीय महत्व का विकास कार्य नहीं किया गया है। उससे पूर्व भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने भी अपने जन्म की मनौती स्थली होने के बावजूद मथुरा के विकास का खांका खींचना तो दूर रहा बल्कि इस सच्चाई को भी नेहरूआने इतिहास का अंग बनने नहीं दिया कि पुत्र के अभाव से व्यथित पण्डित मोतीलाल नेहरू ने कभी मथुरा के श्रीकृष्ण दरबार में घुटने टेके थे जिसका नतीजा यह हुआ कि उन पर मौजूद सभी जीवनियां मनौती स्मारकों की मौजूदगी के बावजूद सच्चाई से मुँह फेरती रही। और अब जब कि लम्बे अंध युग के बाद इतिहास ने करवट ली है और तीर्थनगरी के गुमनाम पन्नों पर नई रोशनी पड़ी है तो मूर्खों को महापुरूषों के नाम पर विवाद सूझ पड़े हैं। डॉ0 शर्मा ने खेद जताया कि ब्रजमण्डल एक तो वैसे ही 1857 से ब्रिटिश हुकूमत के कोपभाजन का शिकार होता रहा और राजधानी के आगरा से प्रयाग स्थानान्तरित होने से सूबे की शैक्षणिक गतिविधियां भी उसके साथ ही छाया की तरह चलती बनी और आगरा को विश्वविद्यालय हासिल करने में 100 वर्षों का लम्बा समय लग गया जबकि उसे कालेज 1823 में ही मिल गया था जहाँ पण्डित मोतीलाल नेहरू और भारतरत्न महामना मदनमोहन मालवीय ने कभी परीक्षायें दी थी। आगे कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के बाद आजाद भारत की सरकार ने भी पुरानी परम्परा कायम रखी और मथुरा को औद्योगिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का केन्द्र बनाने में बेमिसाल कंजूसी दिखायी जिसके चलते क्षेत्र में शैक्षिक व्यवसाय के तो तमाम केन्द्र खुल गये। मगर सरकारी विश्वविद्यालय के अभाव के चलते आम आदमी शिक्षा से दूर होता गया। कहा कि श्रीकृष्ण नगरी में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय अन्तरराष्ट्रीय मानववाद विश्वविद्यालय की स्थापना होने से जहाँ मानववाद का संपूर्ण विश्व में शंखनाद होगा, वहीं क्षेत्र में सदियों से उपेक्षित शैक्षणिक गौरव की पुनसर््थापना होगी और मौजूदा विश्व के समस्त संदीपन अध्यापन के लिए मथुरा में श्रीकृष्ण की तलाश करेंगे। समापन पर डॉ0 शर्मा ने वेटरीनरी विश्वविद्यालय को चन्द्रशेखर आजाद और संग्रहालय चौक क्षेत्र को एफ0 एस0 ग्राउज के नाम घोषित करने एवं फरह रेलवे स्टेशन की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत कायम रखने की माँग की। चेतावनी दी कि यदि समाज और सरकार ने आर0 एस0 एस0 और जनसंघ से पूर्व के भारतीयता सर्जक महापुरूषों के विवाद नहीं सुलझाये तो अनर्गल दीनदयालीकरण के खिलाफ मुहिम भी छेड़ी जायेगी। इससे पूर्व उपस्थितों ने भारतमाता, पण्डित दीन दयाल उपाध्याय, एवं चन्द्रशेखर आजाद के जयकारों से बैठक की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल ‘देश का होगा तभी विकास, याद करोगे जब इतिहास’ के नारे से गूँज उठा। इस अवसर पर डॉ0 महेन्द्र कुमार, प्रो0 धर्मचन्द्र विद्यालंकार, प्रो0 जे0 के 0 शर्मा, अनिल कुमार नागाइच, संजय शर्मा उपस्थित थे।

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