महात्मा गांधी पश्चात् नेहरू पर ढहा मायावादी कहर
इन्दिरा समेत राजीव गांधी साजिश के शिकार
नेहरू की 56वीं पुण्यतिथि पर खोले रहस्य
मथुरा,
महात्मा गांधी की निर्मम हत्या के बाद नेहरू की सुरक्षा पर भयभीत सरदार वल्लभभाई पटेल की आशंका आजादी के 73 वर्षों बाद प्रधानमंत्रीकरण के शिकार नेहरू मेमोरियल से सत्यापित होगी।
इस भवतव्यता पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में पण्डित जवाहरलाल नेहरू की 56वीं पुण्यतिथि पर गणेशधाम कॉलोनी स्थित संस्थान परिसर में बुधवासरी गोष्ठी में मंथन किया गया।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं गांधी, नेहरू, शास्त्री समेत इन्दिराई स्मारकों की वैश्विक प्रस्थापना के प्रस्तावक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि नेहरू मेमोरियल का प्रधानमंत्रीकरण महात्मा गांधी की निर्मम हत्या के बाद नेहरू पर उठे कातिलाना हमले का वह कदम है जिसकी आशंका से भयभीत सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को मौजूदा तीन मूर्ति हाउस की सुरक्षा में जाने पर मजबूर किया था। मगर बदकिस्मती की क्या कहें, मायावादी कौम 72 वर्षों के अन्तराल में खौफनाक मकसद में कामयाब हो गई और जनसंघर्ष हर मोर्चे पर विफल होता गया। आगे कहा कि विभाजन की ताकतों के असली चेहरे राजनीति के साये से पहली बार बेनकाब हुए हैं। मगर अभी भी वे सियासी मोहरों से मकसद निकाल रहे हैं। लिहाजा गोडसे के बाद अब प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को नेता चुना गया है। कहा कि भारत समेत पाकिस्तान पर हावी वर्ग ने निजी मकसदों से जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जिससे दोनों मुल्कों में प्रजातंत्र की जड़ें कमजोर होती गई। भारत में महात्मा गांधी के बाद इन्दिरा गांधी एवं राजीव गांधी की हत्या मायावादियों की साजिश का नतीजा था जिसे राजनीति के अलग-अलग पहनावों में अंजाम दिया गया। कहा कि अतीत में जैसे तमाम खामियों के बावजूद औरंगजेब की मौत से भारत असुरक्षित हो गया था, वैसे ही इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद भारत में प्रजातंत्र कमजोर और महाजनीतंत्र मजबूत होता गया है जो द्वैध शासन के जरिये मकसद हासिल कर रहा है।
डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि मायावादी कौम देश को उन मनमोहक जालों में फंसा रही है जो भविष्य में जनता की फांसी के फंदे साबित होंगे। आगे कहा कि दिनोंदिन छिनते वायु, जल और रोटी के अधिकार गरीबों को वहां पहुंचा देंगे जहां अकाल मौत के अलावा दूसरा विकल्प नहीं होगा। कहा कि नदियों के बाद भूजल पर ढहता कहर ज्वलन्त उदाहरण है जिसे अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है और कोरोना पर भारत महीनों बन्द रखा गया।
डॉ0 शर्मा ने आक्रोश जताया कि आर्थिक समृद्धि के पीछे छल, कपट, शोषण और धोखाधड़ी के अलावा दूसरा कोई चमत्कार नहीं होता। आगे कहा कि देश पर हावी मायावादी कौम ने राष्ट्र का दोहन और गरीबों का शोषण किया है और देखते-देखते फटेहाल लोग ऐशोआराम के हकदार हो गये। खुलासा किया कि पण्डित जवाहरलाल नेहरू के समय जमशेदजी टाटा टैक्स के पचहत्तर लाख रूपये की हेराफेरी में दोषी पाये गये थे। नेहरू को इसका पता लगने पर टाटा ने तो चोरी का टैक्स जमा करा दिया। मगर उस परम्परा में कितने रईस मालामाल होते गये और भारत दरिद्र होता गया जिसके भारी बोझ तले वफादार गरीब पिसते गये और भारतीय मुद्रा पर महात्मा गांधी का अंकन राष्ट्रपिता का मृत्योत्तर दोहन करता रहा। फिर भी वक्त की क्या कहें वही कौम आज राष्ट्र का मार्गदर्शन कर रही है, सरकार गुलामी में नाच रही है और देश बौराता जा रहा है।
डॉ0 शर्मा ने सवाल उठाया कि कोरोनाबन्दी में अगर सोशल डिस्टेंस अनिवार्य थी तो सरकारी राशन वितरण में गरीबों से मशीन पर अंगूठे क्यों लगवाये गये? दूसरे यदि यूनिक आइडेंटीफिकेशन कोरोना संक्रामक नहीं माना गया फिर सोशल डिस्टेंस के नाम पर करोड़ों गरीबों को रोजी-रोटी के लिए क्यों मोहताज किया गया?
डॉ0 शर्मा ने खुलासा किया कि सरदार वल्लभभाई पटेल के आग्रह पर लार्ड माउण्टबेटन के सुझाव के मुताबिक पण्डित जवाहरलाल नेहरू यार्क रोड से तीन मूर्ति हाउस तो चले गये किन्तु उन्होंने बड़े भवन के रखरखाव पर मिलनेवाला पांच सौ रूपये का अतिरिक्त भत्ता स्वीकार नहीं किया। आगे कहा कि मेहमाननवाजी के लिए भी नेहरू पांच सौ रूपये विशेष भत्ते के हकदार थे लेकिन उन्होंने उसे लेने से न केवल इन्कार किया बल्कि अपने वेतन के तीन हजार रूपये से पांच सौ रूपये सरकार को मासिक दान करते रहे। कहा कि एक नेहरू थे जो ईमानदारी की मिसाल थे एक मौजूदा प्रधान मंत्री हैं कि उन पर गरीबों की प्रतिभा चोरी, शोषण एवं दुरूपयोग के आरोप लग रहे हैं और उन्हें जवाब देना दुविधापूर्ण बनता जा रहा है। आगे कहा कि वर्ष 2015 में सरकार को सौंपी गई महामना स्मारक परियोजना ने भोपाल के दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन को अंजाम दिया। मगर सरकार समेत उसके होनहार नौकरशाहों ने परियोजना प्रस्तावक को पूछा तक नहीं। और तो और मनमोहन सिंह सरकार के दौरान महामना आधारित प्लान के मुताबिक नई सरकार ने महामना को भारतरत्न विभूषित करने के बाद स्मारक सिक्के जारी किये। मगर परियोजना प्रस्तावक को पूर्व सरकार द्वारा अनुमोदित परियोजना अधिकारी नहीं बनने दिया गया। कहा कि नेहरू की राष्ट्रसेवा बाकी प्रधानमंत्रियों के लिए नसीहत है और उनका समाजवादी चिंतन तो उन्हें गांधी से भी महान सिद्ध करता है। कहा कि आजादी के दौर में भारत के लगभग सभी शीर्षस्थ नेता घनश्यामदास बिड़ला के खाते से वेतन लेते थे। किन्तु जब उसमें नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पण्डित का नाम पाया गया तो नेहरू ने उनसे सदा के लिए दूरियां बना ली। कहा कि आजादी पूर्व कमला नेहरू की मृत्यु पर नेहरू के पास विदेश जाने के लिए पैसे नहीं थे। लोगों ने उनसे बिड़ला से मदद लेने के लिए बहुत कहा। मगर नेहरू ने बिड़ला से पैसा नहीं लिया। नेहरू के बाद इन्दिरा गांधी ने उनके समाजवादी चिंतन का अक्षरशः पालन किया।
डॉ0 शर्मा ने क्षोभ जताया कि पचास वर्षों के अस्तित्व में नेहरू मेमोरियल स्वयं अपना उद्धार नहीं कर पाया और उसके प्रकल्प फलदायी नतीजों के बजाय जहरीले मुद्दों में बदल गये। आगे कहा कि नेहरू मेमोरियल फण्ड ने अल्पज्ञों से नेहरू वांङमय प्रकाशित करवाकर पचास वर्षों का अमूल्य समय और अरबों रूपये का जनधन बरबाद किया। कहा कि नेहरू मेमोरियल म्युजियम एण्ड लाइब्रेरी के मैनस्क्रिप्ट सेक्शन ने आग में घी डालने का काम किया और उसके अमूल्य दस्तावेज गफलत में गायब होते गये। कहा कि मौखिक इतिहास प्रभाग ने प्रधान मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का साक्षात्कार रिकार्ड करने के बाद उसे लिपिबद्ध नहीं होने दिया। नतीजन पूर्व प्रधान मंत्री अपने संस्मरण सत्यापित करने की अंतिम इच्छा लेकर मर भले गये। मगर संस्था ने उनके जीतेजी उसे पूरा नहीं होने दिया। और अब संग्रहालय के नाम पर प्रधानमंत्रियों का यशस्वी डंका बजाया जा रहा है। कहा कि फेलोखोरी तो और भी मौजमस्ती का जरिया बना रहा और पचास सालों में अरबों रूपये डकारने के बावजूद नेहरूआने इतिहास का यह तथ्य अप्रमाणित ही रहा कि 1857 के विद्रोह के दौरान नेहरू पूर्वज गंगाधर मुगल हुकूमत में दिल्ली के कोतवाल थे या नहीं। यहां तक कि नेहरू के जन्म की मनौती के उपलक्ष्य में पण्डित मोतीलाल नेहरू द्वारा मथुरा में विनिर्मित गोवर्द्धननाथ मन्दिर एवं मारूगली क्षेत्र स्थित कश्मीरी धर्मशाला नेहरू के किसी जीवनीकार को रास नहीं आये। नतीजन नेहरू मनौती स्मारकों की तरह निर्माण निरीक्षक पण्डित मोतीलाल नेहरू के बड़े भाई पण्डित बंशीधर नेहरू एवं मुंशी मुबारक अली का नाम लोगों की जुबां से उतरता गया। और आज हालात ये हो गये कि शहर में किसी को इतना भी याद नहीं कि पण्डित बंशीधर नेहरू मोक्षवास के दौरान मथुरा में रहते कहां थे?
डॉ0 शर्मा ने पुस्तकालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कहा कि पंजाबीकरण के चलते पुस्तकालय ने भगतसिंह पर तो रैक के रैक भर दिये गये। मगर 20वीं सदी में क्रान्तिकारी आन्दोलन के महानायक चन्द्रशेखर आजाद पर दस पुस्तकें भी नहीं खरीदी गई। आगे कहा कि अर्द्धशताब्दिक विसंगतियों पर वर्ष 2011 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी का ध्यान आकर्षित किया गया था। उस वक्त सदरे रियासत डॉ0 कर्णसिंह ने बीचबराव करके सभी मामले रफा-दफा कर दिये। रहा बोफोर्स मामले का राजीव गांधी पर आरोप तो उसे संसद के अन्तिम बोफोर्स विस्फोट में तब्दील किया गया जिसके तात्कालिक लाभों ने भारतीय जनता पार्टी को वर्चस्व और अमिताभ बच्चन को अभियोगमुक्त होने का मौका प्रदान किया। उसके बाद ही कांग्रेस सदा के लिए मसीही हो गई। खेद जताया कि सदरे रियासत का राजयोग उन्हें हमेशा गलत फैसलों से जोड़ता रहा है। उस नजरिये जघन्य अपराधों के आरोपी बालाकृष्णन का नेहरू मेमोरियल फण्ड में प्रशासनिक सचिव बनना खास मायने रखता है। गौरतलब है कि बालाकृष्णन तमाम अपराधों के क्रम में उस अपराध के प्रमुख आरोपी हैं जिसके अन्तर्गत बोफोर्स पर विश्वनाथ प्रताप सिंह के साक्षात्कार में राजीव गांधी को दोषी सिद्ध किया गया है। कहा कि विषाक्त कार्यप्रणाली से बजबजाती संस्था में मौजूदा प्रधान मंत्री नेहरू वंशेतर पूर्व प्रधानमंत्रियों के गुणगान की उम्मीद पर पता नहीं क्यों दहाड़ रहे हैं? जबकि रौलट विरोध के शताब्दिक वर्ष 2019 में पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने जलियांवाला बाग पर मार्मिक वक्तव्य देकर उन्हें चारों खाने चित किया है। आगे कहा कि जलियांवालाबाग पर पाकिस्तान प्रधान मंत्री का वक्तव्य ज्यादा भारतीय लगा और भारतीय प्रधान मंत्री मुंह ताकते रह गये। कहा कि प्रधान मंत्री को प्रस्तावित संग्रहालय की ओर से मिला यह पहला तोहफा है जिसे उनके मूर्ख चहेतों ने भेंट किया है और जिनके इशारे पर वह भावी नतीजों की परवाह किये बगैर नेहरू मेमोरियल के प्रधानमंत्रीकरण पर नाच रहे हैं। कहा कि उसी दौरान संस्थान के प्रयत्नों से मथुरा में आयोजित रौलट विरोधी गांधी सप्ताह से कांग्रेस ने फायदा उठाया और राहुल प्रियंका फूलमालाओं के साथ झट राजघाट दौड़ पड़े।
डॉ0 शर्मा ने कांग्रेस पार्टी की स्थानीय निष्क्रियता पर क्षोभ जताया। कहा कि भाजपा की तरह कांग्रेस में भी मायावादी कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है जिसके चलते नेहरू मेमोरियल विध्वंश के बरखिलाफ जिले में प्रतिक्रिया नहीं हुई। आगे कहा कि स्वार्थलिप्सा, अवसरवादिता की मारामारी में पार्टी से महात्मा गांधी, पण्डित जवाहरलाल नेहरू समेत इन्दिरा गांधी के त्याग, तपस्या और बलिदान का भाव दूर होता गया है। जिसके चलते नेहरू मेमोरियल विध्वंश का दिल्ली विरोध कांग्रेसियों से खाली रहा जिसकी भरपाई संस्थान के निजी प्रयत्नों से हुई।
इससे पूर्व उपस्थितों ने माँ यमुना एवं पण्डित जवाहरलाल नेहरू के चित्रपटों पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोलन स्थल माँ यमुना व भारत माता के जयकारों एवं ^जब तक सूरज चाँद रहेगा, जवाहरलाल नेहरू का नाम रहेगा’^पण्डित जवाहरलाल नेहरू अमर रहें’नारों से गूँज उठा।
इस अवसर पर राजेश शर्मा, सुभाष गुप्ता, डॉ0 धर्मचन्द्र विद्यालंकार, शेरसिंह राणा, प्रेममोहन पण्डित उपस्थित थे।





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