सवाई जयसिंह बगैर बेनूर रहेगी हिन्दुत्व की नर्गिस - डॉ0 शर्मा

 

277वीं पुण्यतिथि पर हिन्दुत्वोद्धारक नरेश का स्मरण


सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर मथुरा की अभिनव शुरूआत

जयसिंहपुरा के 300वें स्थापना वर्ष पर आयोजन

मथुरा,



    वीर शिवाजी समेत सरदार वल्लभभाई पटेल माना कि प्रधान मंत्री के चलते हिन्दुत्वोद्धारक प्रतिमान सिद्ध किये गये हैं। मगर उस मुकाम पर सवाई जयसिंह को प्रतिष्ठित किये बगैर हिन्दुत्व की नर्गिस बेनूर ही रहेगी। 

यह आह्वान सवाई जयसिंह की 277वीं पुण्यतिथि समेत जयसिंहपुरा खेड़ा के 300वें स्थापना वर्ष पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को गणेशधाम कॉलोनी क्षेत्र स्थित झिरीवाल धर्मशाला (तमोली पैलेस) में आयोजित ^सवाई जयसिंह बनाम जयसिंहपुराखुला मंच में किया गया।



संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं धरोहर बचाओ आन्दोलन के अन्तर्गत सवाई जयसिंह स्मृतियों के पुनर्खोजी डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री हिन्दुत्वोद्धारक छवि के बावजूद सदियों से प्रतीक्षित हिन्दुवाई चमन की नर्गिस का दीदार करने में नाकाम रहे हैं। नतीजन उनके समस्त प्रयोग वैश्विक रिकार्ड के बावजूद उन ऊँचाइयों को नहीं छू पा रहे है जिनके लिए उन्हें निर्मित किया गया था। आगे कहा कि हिन्दुत्व की रक्षा में अगर सैन्य प्रदर्शन की बात करें तो तो मथुरा में गजनवीं के मुकाबले कुलचन्द, हल्दी घाटी में अकबर के सम्मुख महाराणा प्रताप कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण जान पड़ते हैं किन्तु शस्त्र के साथ यदि शास्त्र रक्षा की बात करें तो सवाई जयसिंह की मिसाल भारत तो क्या पूरी दुनिया में जल्द नहीं मिलेगी। कहा कि महज 55 वर्ष की अल्प आयु में 22 विद्याओं में पारंगत नरेश ने भारत के समस्त राजा महाराजाओं को ही नहीं बल्कि सिद्धान्त ज्योतिष में तो विश्व के सम्राटों को भी विश्वकोषीय ज्ञान का लोहा मनवा दिया था।



डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि सिर्फ तीन सौ वर्षों के अन्तराल में ब्रजमण्डल से सवाई जयसिंह की स्मृतियों का विलोपन भारत ही नहीं बल्कि विश्व के लिए शर्म की बात है। आगे कहा कि जयसिंहपुरा क्षेत्र स्थित सवाई जयसिंह महलबाशिन्दों को यह नहीं पता है कि उसके निर्माता कौन थे? मथुरा में सवाई जयसिंह द्वारा विनिर्मित सीताराम मन्दिर की खोज अब तक नहीं हो सकी। मोक्षनगरी के समस्त प्राचीन राममन्दिरों के सेवायतों को उनकी पौराणिक प्राचीनता के अलावा दूसरी जानकारी नहीं है। कहा कि कंस के नाम से विख्यात मानसिंह किले में सवाई जयसिंह द्वारा बनवाई गई वेधशाला का 1857 से पूर्व सरकारी ठेकेदार ज्योति प्रसाद द्वारा विध्वंश सबसे जघन्य अपराध था जो स्मारक के सांस्कृतिक महत्व एवं विनिर्माता की दूरदर्शिता की जानकारी बगैर नहीं किया गया होगा।



डॉ0 शर्मा ने खुलासा किया कि सवाई जयसिंह ने सन् 1720 में मथुरा नगर से बाहर वृन्दावन मार्ग पर जयसिंहपुरा खेड़ा की स्थापना की थी जिसके अन्तर्गत मसानी नाले (सरस्वती नदी) की घाटी से लेकर महाविद्या का मैदान, गणेश टीला समेत मौजूदा बिड़ला मन्दिर के इलाके आते थे। आगे कहा कि मौजूदा गायत्री तपोभूमि, राधेबाबा टीला समेत श्याम बाबा आश्रम आदि क्षेत्र सवाई जयसिंह विनिर्मित महल के हिस्से थे, जहाँ वह समय­समय पर प्रवास करते थे। कहा कि वृन्दावन स्थित जयसिंहघेरा कभी सवाई जयसिंह की अदालत से गुलजार रही थी। मथुरा स्थित मानसिंह किले का सर्वाधिक उपयोग सवाई जयसिंह द्वारा किया गया, जहाँ से कई सैन्य अभियानों की शुरूआत भी हुई थी।

 


 डॉ0 शर्मा ने तमाम जानकारियों के बावजूद जनप्रतिनिधियों में सांसद हेमामालिनी समेत विधायक श्रीकान्त शर्मा द्वारा आयोजन की उपेक्षा पर आक्रोश जताया। कहा कि उनके इस व्यवहार से जनप्रतिनिधित्व की प्रासंगिकता ही नहीं बल्कि उनकी स्वयं की योग्यता एवं जागरूकता पर भी सवाल उठा है। मजे की बात तो यह हैं कि दोनों को मंत्री से बढ़कर सम्मान दिया गया है। कहा कि विगत वर्ष भी संस्थान द्वारा महात्मा गांधी के 150वें जन्मोत्सव पर गांधी इतिहास की पुनर्खोज से उद्घाटित विलुप्तप्राय जनपदीय धरोहर के अन्तरराष्ट्रीय महत्व पर सांसद महोदया से संसदीय सवाल उठाने का सुझाव दिया गया था। मगर अदाकारा ने अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया जिसके चलते जनपद समेत राष्ट्र की जो अपूर्णनीय क्षति हुई है, उसकी सामयिक भरपाई फिर कभी नहीं हो सकेगी। कहा कि और तो और अदाकारा को संस्थान द्वारा मथुरा के तेईस सौ साल पहले के इतिहास पर आधारित ^कहीं वासव-उपगुप्त तो नहीं रही हेमा मोदी की जोड़ीशोध परियोजना में परिकल्पित स्वयं का वासवगुप्त अवतरण भी रास नहीं आया। जबकि परियोजना ने उन्हें पार्टी हाईकमान से दुबारा टिकट दिलाने में काफी मदद की थी। यहाँ तक कि कविगुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा अनूठे प्रेम प्रसंग पर काव्य प्रस्तुति की जानकारी प्रदान करने के बावजूद सांसद ने संस्थान द्वारा वासवदत्ता पर नृत्य नाटिका और गायन, वादन समेत नृत्य समर्पित सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना के सुझाव पर अमल नहीं किया। और अब हिन्दुत्वोद्धारक नरेश सवाई जयसिंह की पुण्यतिथि से उनका कोई सरोकार नहीं रहा। कहा कि कोरोना के बहाने आयोजन से पल्ला झाड़ने पर हिन्दुत्वोद्धारक अन्तरराष्ट्रीय प्रतिमान पर सन्देश तक नहीं दिया गया। जिससे उनकी सामाजिक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सांसद के पदचिह्नों पर विधायक श्रीकान्त शर्मा, पूरन प्रकाश, कारिन्दा सिंह, चौधरी लक्ष्मीनारायण समेत श्यामसुन्दर शर्मा चलते रहे हैं। अतएव उनके उपेक्षित रवैये के विरुद्ध चुनाव आयोग समेत सम्बधित मंत्रालयों से शिकायत की जायेगी ताकि जनहित के नाम पर डकारे जा रहे अरबों­खरबों रुपये के अकूत जनधन की सच्चाई का पता चल सके। कहा कि विश्वस्तरीय आकाशवाणी­दूरदर्शन केन्द्र की माँग के बावजूद नजरों से ओझल दूरदर्शन एवं मायावी पाताल के दलदल में  फँसी आकाशवाणी का उद्धार भी अहम सवाल है। जिसके चलते जयसिंहपुरा क्षेत्र में संस्था की स्थिति एवं संस्थान द्वारा मुफ्त जानकारियों के बावजूद सवाई जयसिंह को विधा पर उचित स्थान नहीं दिया गया। कहा कि संस्था ने पूर्व में भी भारतरत्न महामना मदनमोहन मालवीय एवं महात्मा गांधी पर अपेक्षित कर्तव्यपालन नहीं किया जिसके चलते दोनों महान विभूतियों का ब्रजमण्डलीय इतिहास राष्ट्रीय स्तर पर नहीं लाया जा सका। कहा कि मथुरा संग्रहालय और शोध संस्थानों की भरमार तो रोटी तोड़ने के सेन्टर्स हैं जहाँ से न तो कुछ हासिल किया जा सकता है और न ही उन्हें दिया जा सकता है। कहा कि शहंशाही चालचलन के चलते प्रतिबद्धताओं से दूर होती गई पत्रकारिता से जीवन्त प्रकाशन की उम्मीद हवाई किले से भी कठिन है। नतीजन सामाजिक सरोकार से विच्छिन्न विधा खबरखोरी में तब्दील हो गई। कहा कि बौद्धिक जगत तो सबका गुरू है जो हमेशा पुरस्कार, सम्मान और धन लपकने में ही काबिलीयत समझता है। अंततः मायावाद के कुहासे में धार्मिक­सांस्कृतिक नगरी की जागरूक संस्थायें सोती रहीं और -ब्रज विरासत के अनमोल खजाने गुमनामी में खोते गये। कहा कि अरबों रुपये के बजट पर मौज फरमाते नगर निगम ने डेढ़ सौ वर्षों के लम्बे दौर में सांस्कृतिक विकास पर अब तक कौड़ी भी खर्च नहीं की और फटेहाल सदस्य नवाब बनते गये।



डॉ0 शर्मा ने आयोजन में क्षेत्रवासियों की नगण्य उपस्थिति पर खेद जताया। कहा कि एनजीटी इलाके की मुफ्त बसावट निःशुल्क बिजली और फ्री भूजल में धुत बाशिन्दों से सांस्कृतिक उत्थान और सभ्य आचरण की उम्मीद जमीं पर सितारे लाने से भी दुस्तर है। ऐसे में प्रगतिशील गतिविधियों में उनकी भागीदारी मूल्यांकन का आधार मानने से बड़ी भूल और क्या होगी? कहा कि वर्ष 2011 में यमुना मुक्ति आन्दोलन ऐसी ही परिस्थितियों में शुरू किया था। उस वक्त भी अगर प्रतिभागियों का मुख देखा गया होता तो शायद देश गंगा­यमुना मुक्ति आन्दोलन से वंचित रह गया होता और शुद्धि का छल लोगों को अभी तक ठग रहा होता।



समापन पर डॉ0 शर्मा ने बताया कि जयसिंहपुरा के स्मारकीय वर्ष के चलते सवाई जयसिंह के जन्मदिवस पर आगामी 3 नवम्बर को गणेशधाम कॉलोनी स्थित संस्थान में महान आत्मा का पुनः स्मरण किया जायेगा। 

इससे पूर्व उपस्थितों ने सवाई जयसिंह के चित्रपट पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात आयोजन स्थल पर भारत माता समेत ^सवाई जयसिंह के जयकारों एवं सवाई जयसिंह अमर रहें, ^जब तक सूरज चाँद रहेगा, सवाई जयसिंह का नाम रहेगानारों से गूँज उठा।



समापन पश्चात् आकाशवाणी उद्घोषक जितेन्द्र सिंह ने आयोजन के प्रसारण हेतु पर उपस्थितों के साक्षात्कार रिकार्ड किये। इस अवसर पर भाजपा नगर मीडिया प्रभारी सुमित शर्मा, भाजपा कृष्णानगर मण्डल उपाध्यक्ष सन्त कुमार शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश शर्मा, शिवा डेरान उपस्थित थे।

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