ज्ञापन पर गृहमंत्री आरटीआई में तलब
फरह स्टेशन
की ऐतिहासिकता
बरकरार रखने
पर जोर
उज्जवला के
परिवर्तित समर्पण
पर सवाल
मथुरा,
महापुरूषों
के जीवन
से लाभ
उठाने की
भाजपाई परम्परा
पर उस
वक्त एक
और आरोप
पुख्ता हो
गया, जब
मथुरा में
प्रस्तावित पण्डित
दीनदयाल उपाध्याय
नामित अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की
स्थापना पर
गृहमंत्री अमितशाह
से जवाब
देना मुश्किल
होता गया।
यह खुलासा
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय की
104वीं जयन्ती
पर डॉ0
रमेश चन्द्र
शर्मा स्मारक
शोध एवं
सेवा संस्थान
के तत्वावधान
में 25 सितम्बर शुक्रवार
को गणेशधाम
कॉलोनी स्थित
संस्थान में
आयोजित कार्यक्रम
में किया
गया।
संस्थान के
संस्थापक अध्यक्ष
एवं पण्डित
दीनदयाल उपाध्याय
अन्तरराष्ट्रीय मानववाद
विश्वविद्यालय के
स्वप्नदृष्टा व
सूत्रधार डॉ0
सुरेश चन्द्र
शर्मा ने
आरोप लगाया
कि भाजपा
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय की
दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु
भुनाने के
फेर में
हजारों करोड़
रुपये बरबाद
कर सकती
है। मगर
महामानव की
अन्तरराष्ट्रीय प्रस्थापना
पर विश्वविद्यालय का प्रस्ताव
सुनकर उसे
साँप सूंघ
गया। आगे
कहा कि
विश्वविद्यालय के
बाबत वर्ष
2017 में प्रस्ताव
सौंपने पर
तत्कालीन भाजपा
अध्यक्ष अमितशाह
ने उसे
दिखवाने का
आश्वासन दिया
था। मगर
वर्ष दर
वर्ष बीतने
के बावजूद
उनसे प्रस्ताव
का जवाब
देना दूभर
होता गया।
कहा कि
अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के बाबत
आरटी आई
का भी
जवाब नहीं
दिया गया।
इसी बीच
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय नामित
उज्जवला प्रधान
मंत्री को
समर्पित हो
गई और
महामना के
बाद दीनदयाल
के साथ
दुबारा विश्वासघात
रोका नहीं
जा सका।
डॉ0 शर्मा
ने रोष
जताया कि
सरकार से
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय की
जन्मस्थली को
उनके नाम
करते नहीं
बना। मगर
वह स्टेशन
जो हिन्दुत्वोद्धारक सम्राट अकबर
महान के
जन्म की
खुशी में
उनकी माँ
हमीदा बेगम
द्वारा स्थापित
फरह गांव
की खबर
देता था,
उसे दीनदयालधाम
बना दिया
गया।
आगे कहा
कि मथुरा
में 19 अक्टूबर 1875 के दिन
रेल का
सपना साकार
करनेवाले तत्कालीन
कलेक्टर फ्रेडरिक
सिल्वन ग्राउज
का कहीं
नामोनिशां नहीं
छोड़ा गया
किन्तु रेल
से जीनेमरने
की यादगार
में दीनदयाली
स्टेशन ईजाद
कर दिये
गये। कहा
कि भाजपा
सिर्फ सत्ता
कायम रखने
के रास्ते
तलाश रही
है जैसा
कि कांग्रेस
ने आजादी
से पूर्व
किया था।
पार्टी का
देश और
देशवासियों से
कोई सरोकार
नहीं है।
चेतावनी दी
कि यदि
सरकार ने
मथुरा में
संस्थान के
दीनदयाल नामित
अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना
के प्रस्ताव
पर अमल
नहीं किया
तो उसके
खिलाफ विपरीत
प्रभावकारी प्रतिक्रिया
होगी।
डॉ0 शर्मा
ने आक्रोश
जताया कि
एकात्म मानववादरूपी
अद्वैत दर्शन
के प्रस्थापक
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय की
नगरा चन्द्रभान
स्थित जन्मस्थली
को भी
नहीं छोड़ा
गया। और
उसे उस
वक्त बड़ी
बेरहमी से
ढहा दिया
गया, जब
मायावी पूँजीपतियों
को दीनदयाल
दुधारू गाय
साबित होने
लगे। आगे
कहा कि
बीड़ी, सिगरेट,
पान, सुपारी
जैसे पतनोन्मुखी
धन्धों में
लिप्त पूँजीपतियों
ने दीनदयाल
के बाद
भारतरत्न महामना
मदनमोहन मालवीय
को भी
निशाना बनाया
और हासानन्द
गोचरभूमि में
कायम महामना
समेत हासानन्द
की स्मृतियों
को क्षुद्र
स्वार्थोंवश ढहा
दिया गया।
कहा कि
महामना और
हासानन्द ने
गोसेवा हेतु
मथुरावृन्दावन मार्ग पर
1100 एकड़ भूक्षेत्र
में गोचरभूमि
की स्थापना
की थी।
किन्तु भविष्य
में उसके
मौजमस्ती का
गोलोकधाम बन
जाने की
संभावना उनके
स्वप्न में
भी नहीं
थी।
इससे पूर्व
उपस्थितों ने
पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय समेत
माँ यमुना
के चित्रपट
पर पुष्पार्चन
से आयोजन
की शुरूआत
की। तत्पश्चात्
आयोजन स्थल
भारत माता
व माँ
यमुना के
जयकारों एवं
^पण्डित दीनदयाल
उपाध्याय अमर
रहें’
^जब तक
सूरज चाँद
रहेगा, पण्डित
दीनदयाल उपाध्याय
का नाम
रहेगा’नारों से
गूँज उठा।
इस
अवसर पर
गिरीश चन्द्र
शर्मा, शिबू
बाबू, कमलेश,
जगदीश, ए0 के0 मिश्रा उपस्थित थे।




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