अविस्मरणीय रहेगा गांधी का सर्वस्व न्यौछावर-डॉ0 शर्मा

















विश्वात्मा को प्रदान करें कर्मकाण्ड में स्थान

मथुरा के गांधी इतिहास पर वैश्विक पहल की शुरूआत

151वीं जयन्ती पर गांधी पार्क क्षेत्र में आयोजन

मथुरा,

      देश और काल के वशीभूत महाभारत के युद्ध में बलिदान भीष्म पितामह का ऋण जैसे कर्मकाण्ड में स्थान देने के बावजूद चुकाया नहीं जा सका। वैसे ही मोक्ष पथ पर आरूढ़ विश्ववंद्य विश्वात्मा महात्मा गांधी द्वारा स्वदेश एवं निखिल मानव की सेवा में सर्वस्व न्यौछावर सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

इस भवतव्यता पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में महात्मा गांधी की 151वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में गांधी पार्क क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में मंथन किया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं मथुरा के गांधी इतिहास की वैश्विक प्रस्थापना के प्रस्तावक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भारत में गांधी चेतना के उज्ज्वल प्रकाश को वितंडाओं के बादलों से ढांकने की लाख कोशिशों के बावजूद महामानव का स्वर्णिम आभास मिटाया नहीं जा सका और गुनाहगारों को अंततः उनकी शरण में जाकर कामयाबी की भीख मांगनी पड़ी। आगे कहा कि यह वितंडाओं का ही प्रभाव था कि मथुरा के गांधी इतिहास के दुर्लभ वाकिआत गुमनाम होते गये और लोगबाग ऐशो आराम की जिंदगी बसर करते रहे। कहा कि सौ साल बाद संस्थान द्वारा वैश्विक महत्व के गांधी इतिहास को उद्घाटित करने के बावजूद विधायकों समेत मौजूदा सांसद, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, जंक्शन रेलवे स्टेशन निदेशक को दायित्व बोध नहीं हुआ और  गांधी विरासत के मूक गवाह गांधी पार्क, जंक्शन रेलवे स्टेशन समेत पुलिस लाइन 151वीं जयन्ती पर सूने रह गये। इतना जरूर हुआ कि गांधी की 150वीं जयन्ती पर संस्थान की गांधी विषयक नई खोजों को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। मथुरा संग्रहालय के यशस्वी उप निदेशक डॉ0 एस0 पी0 सिंह तो संस्थान की पुनर्खाेज की भनक लगने पर 150वीं जयन्ती से पूर्व वर्ष 2018 के अक्टूबर माह में खबरखोरों का सहारा लेते हुए गांधी की गिरफ्तारी पर व्याख्यान मात्र से पीटीआई की सुर्खियों में छा गये जिसका संस्थान द्वारा खण्डन किया गया। तत्पश्चात् रौलट विरोधी गांधी सप्ताह के दौरान अप्रैल माह के आयोजन में ईमानदारी दिखाने के बावजूद राजस्थान पत्रिका के निर्मल राजपूत जयन्ती पर रिकार्ड शोधात्मक तथ्यों को लेकर डगमगा गये और रिकार्डेड सामग्री प्रकाशित होने के बजाय उनकी निजी सम्पत्ति बन गई। कहा कि ऐसे ही वर्ष 2011 में यमुना मुक्ति आन्दोलन की शुरूआत पर अमर उजाला खबार ने मुंह काला किया था और खबर को तोड़-मरोड़कर प्रकाशित करने के बाद झट रमेश बाबा के हाथों बेच दिया। नतीजन 

उसके बाद बाबाओं की लाइन लग गई। फिर चाहे गुरूशरणानन्द हों 

या जयकृष्णदास या फिर दान न लेने के दम्भ से भरा

 यमुना मिशन हो। सभी आन्दोलन के सूत्रधार बनने लगे। कहा कि 

इससे पूर्व रौलट विरोधी गांधी सप्ताह ने अप्रैल 2019 में राष्ट्रीय राजनीति


 को प्रभावित किया जिसके तात्कालिक परिणामस्वरूप प्रियंका समेत


 राहुल गांधी झट राजघाट दौड़ पड़े और भारत के प्रधान मंत्री मुंह 

ताकते रह गये। बल्कि उसी दौरान पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान

 खान का जलियांवालाबाग नृशंस नरसंहार पर मार्मिक वक्तव्य आने से

 तो वह चारों खाने चित हो गये।

डॉ0 शर्मा ने नौकरशाही की अकर्मण्यता पर क्षोभ जताया। कहा कि रोटियां तोड़ने की आदी कौम के कान जानकारी देने के बावजूद खड़े नहीं हुए और रेल मंत्री पीयूष गोयल का प्रचण्ड नेतृत्व मथुरा की रेल विरासत में गांधी को स्थान नहीं दे सका। जबकि गांधी हत्या के प्रतिवाद में दीनदयाल उपाध्याय के बवन्डर को हवा देने में हिन्दुत्वोद्धारक सम्राट अकबर से जुड़ी फरह स्टेशन की ऐतिहासिकता दफन करने में वह जरूर पीछे नहीं रहे। डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि नगरपालिका से नगर निगम में प्रोन्नत संस्था ने तमाम अनुस्मारकों के बाद भी गांधी पार्क स्थित प्रतिमा के पश्चभाग में उत्कीर्णित ऐतिहासिक शिलालेख का रंगरोगन नहीं कराया और कमीशनखोरी के विकास कार्य अबाधित चलते रहे। आगे कहा कि गांधी पार्क में उत्कीर्णित गांधी सन्देश वह दुर्लभ रत्न है जो अन्यत्र दिखाई नहीं देता है। ऐसे में उसे अंकित करानेवालों के नाम कैसे मिटने दिये जा सकते हैं? कहा कि आजादी की रजत जयन्ती पर 1972 में उत्कीर्णित गांधी दर्शन के चिंतक उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि स्वयं महात्मा गांधी। फिर उनके नाम रंगरोगन करने में नगर निगम ने कोताही क्यों दिखाई? कहा कि व्यापारिक स्वार्थवश विकास पार्क क्षेत्र स्थित गांधी प्रतिमा गैर ऐतिहासिक होने पर भी पूजी जाती रही और गांधी पार्क की ऐतिहासिकता राष्ट्रीय योगदानों के बावजूद नजरअन्दाज होती रही।

डॉ0 शर्मा ने नगर निगम से गांधी पार्क के जीर्णोद्धार की माँग की। कहा कि यदि ऐतिहासिक स्थल का रखरखाव नहीं किया गया तो उसके महत्वहीन होने से वैसे ही नहीं रोका जा सकेगा। जैसे कि परिसर स्थित सेवा समिति, लक्ष्मीदास हाल और पुस्तकालय को तबाह और बरबाद होने से बचाया नहीं जा सका। कहा कि वैसे भी परिसर की पुख्ता सराय से पुरानी कोतवाली के बाद गांधी पार्क में तब्दीली कम दिलचस्प नहीं है। जिससे राष्ट्रीय आन्दोलन की कई प्रेरक घटनायें जुड़ी हैं। लिहाजा उनके संजोने मात्र से विरासत संरक्षण का दोहरा लाभ हासिल किया जा सकता है। 

इससे पूर्व उपस्थितों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल भारत माता समेत महात्मा गांधी के जयकारों एवं जब जब सूरज चांद रहेगा, महात्मा गांधी का नाम रहेगा’ महात्मा गांधी अमर रहें जैसे नारों से गूंज उठा।

इस अवसर पर चौ0 हर्ष कुमार, मनीष चतुर्वेदी, पवन, चेतन, फरान, रहीम, रिहान, जीशान, फैजान, जगदीश, अभय दिवाकर, ओंकार स्वामी, मुशीर उद्दीन, साहिल मनिहार, चिम्मनला




, बालकिशन, अनिल, प्रमोद, कान्हां चौहान, यश दिवाकर, अमन खान, विष्णु शर्मा, राजकश, अनूप चतुर्वेदी उपस्थित थे।    

  

 

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