कश्मीर विलय से नरेन्द्र मोदी अशोकावतार के हकदार - डॉ0 शर्मा



 








31 अक्टूबर घोषित हो राष्ट्ररक्षा दिवस

भारतत्व की तलवार से विभूषित हों प्रधान मंत्री

मथुरा,

          तेईस सौ साल पहले चक्रवर्ती मौर्य सम्राट अशोक  द्वारा स्वात घाटी में शान्ति स्थापना की मिसाल प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2019 कश्मीर में दोहराये जाने से उनके अशोकावतार होने की पुष्टि हुई है।

इस प्रस्थापना पर सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म दिन , भूतपूर्व प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी के बलिदान एवं कश्मीर के भारत विलय समेत भूजल बचाओ आन्दोलन को समर्पित राष्ट्ररक्षक सप्ताह ¼25 से 31 अक्टूबर) की प्रथम वर्षगांठ के समापन पर शनिवार को गणेशधाम कॉलोनी स्थित संस्थान परिसर में मंथन किया गया। 

संस्थानके संस्थापक अध्यक्ष एवं राष्ट्ररक्षक सप्ताह के स्वप्नदृष्टा सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि 72 सालों से जिस कश्मीरी उलझन को सरकारें अन्तरराष्ट्रीय हौआ बनाती रहीं, उसे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ही फूँक से उड़ा फेंका है। आगे कहा कि प्रधान मंत्री को हिन्दुत्व से अलग राष्ट्रीयता के आइने से देखने की जरूरत है और तब उन्हें स्वोर्ड ऑफ इन्डियननेस यानी कि भारतत्व की तलवार कहे जाने से इन्कार नहीं किया जा सकेगा। कहा कि प्रधान मंत्री ने कश्मीर विलय के माध्यम से भूतपूर्व प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी के अमर बलिदान और सरदार वल्लभभाई पटेल के नैष्ठिक कर्मयोग की रक्षा की है लिहाजा 31 अक्टूबर 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह राष्ट्ररक्षक दिवस घोषित किया जाये और उसकी स्मृति में देशभर में प्रतिवर्ष 25 से 31 अक्टूबर तक राष्ट्ररक्षक सप्ताह मनाया जाये।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि आजादी के 72 सालों से लौह महिला प्रधान मंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली को जितनी तर्जीह दी, ब्रजवासियों ने उसे उतनी ही बेकद्री से ठुकराया है। आगे कहा कि मथुरा रिफाइनरी को लेकर इन्दिरा गांधी की बहुत आलोचना की गई थी। कारण कि मथुरा क्षेत्र में तो कोई तेल के भूभण्डारण थे और ही आपूर्ति के साधन। बल्कि रिफाइनरी के लिए हजारों मील दूर से कच्चा तेल लाने की समस्या सबसे बड़ी मुसीबत थी। मगर इन्दिरा जी कृष्णोपासना को समर्पित रहीं और उसके लिए उन्होंने रिफाइनरी मथुरा में स्थापित करके ही दम लिया। कहा कि रिफाइनरी स्थापना के ही दौर में एफ0 एस0 ग्राउज द्वारा स्थापित मथुरा संग्रहालय के भी 1974 में सौ वर्ष पूरे हो रहे थे। जिसे भव्यता प्रदान करने के लिए संग्रहालय क्युरेटर रमेश चन्द्र शर्मा दिन-रात एक करके जुटे थे। उसी समय डॉ0 शर्मा का ध्यान प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी की ओर गया और उनके आमंत्रण को इन्दिरा जी ने सहज ही स्वीकार कर लिया। फलतः सुरक्षा की तमाम अड़चनों के बावजूद श्रीमती गांधी आयोजन में शरीक हुई। डॉ0 शर्मा की उस कामयाबी के उपलक्ष्य में सौ वर्षों से चलते आये क्युरेटर पद को निदेशक में तब्दील किया गया और डॉ0 शर्मा मथुरा संग्रहालय के इतिहास में प्रथम निदेशक हो गये।        

इससे पूर्व उपस्थितों ने माँ यमुना के चित्रपट पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल भारत माता एवं माँ यमुना के जयकारों समेत ^जब तक सूरज चाँद रहेंगे’ पटेल, इन्दिरा,  मोदी के नाम रहेंगे ^यह कश्मीर हमारा है और सारे का सारा है नारों से गूँज उठा।

इस अवसर पर पंडित गिरीश चन्द्र शर्मा, पंडित विष्णु शर्मा, मुकेश सिंह, साहिल, देवेश उपस्थित थे।        

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