मथुरा,
धर्म नशा है
की कहावत पाश्चात्य देशों पर बेशक खरी न उतरी हो । मगर भारत में उसका जीता-जागता
नजारा धर्मनाशी वृन्दावन कुम्भ में दिख रहा है।
कार्लमाकर््स के इस प्रासंगिक कथन को लेकर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान (उग्रतपा
चिंमभ कुटी) के तत्वावधान में वृन्दावन कुम्भ महोत्सव पर शनिवार को गणेशधाम कॉलोनी
स्थित संस्थान परिसर में आयोजित ‘धर्म कहे यमुना लौटाओ, वरना योगी वापस जाओ’ खुला मंच में मंथन किया गया।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं यमुना मुक्ति समेत नदियां
छोड़ो सीवर जोड़ो आन्दोलन के प्रवर्तक डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि जिस जल के छूने मात्र
से मेडिकल साइन्स त्वचा कैंसर की संभावना जता रही हो। उसके सार्वजनिक स्नान पर
प्रतिबंध के बजाय महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। आगे कहा कि यमुना मुक्ति आन्दोलन
की नगरी में अनाप-शनाप धन बहा कर धर्म का हनन किया जा रहा है ताकि यमुना दुर्दशा
पर खुली बहस न हो सके। कहा कि तथाकथित धर्म और राज्य के गठबंधन मनुस्मृति के उस
सन्देश को सत्य साबित करने में जुटे हैं जिसमें मारे गये धर्म को मार डालनेवाला
बताया गया है।
इससे पूर्व उपस्थितों ने माँ यमुना के चित्रपट पर
पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल माँ यमुना समेत भारत के
माता के जयकारों एवं ‘रूके नहीं यदि गिरते सीवर, शुद्ध नहीं होगी कोई रीवर’ मत खेलो शुद्धि का छल, मुक्ति मात्र नदियों का हल’ ‘यमुना मुक्ति का हल करो सवाल, मोदी खट्टर केजरीवाल’ ‘धर्म कहे यमुना लौटाओ, वरना योगी वापस जाओ’ नारों से गूँज उठा।
इस अवसर पर डॉ0 महेन्द्र कुमार, प्रो0 धर्मचन्द विद्यालंकार, गिरीश शर्मा उपस्थित थे।

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