विराट पुरूष की अवरुद्ध सांसों से फैला कोरोना - डॉ0 शर्मा

https://www.youtube.com/watch?v=rMOFXLoZPK0
https://www.youtube.com/watch?v=rMOFXLoZPK0


 


हनुमान जयन्ती पर विश्व वायु दिवस की माँग

कोरोना को मत पहनायें आतंकी जामा

पुनर्चक्रण के निजी उपायों से वायु शुद्धि पर जोर

मथुरा,

     प्रदूषित वायु, जल समेत खाद्यान्नों के चलते अवरुद्ध विराट पुरूष के श्वास-प्रश्वास पृथ्वी पर कोरोनाकारी सिद्ध हुए।

इस भवतव्यता पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान  में 27 अप्रैल को हनुमान जयन्ती के अवसर पर वृन्दावन स्थित केशीघाट क्षेत्र में विश्व वायु दिवस खुला मंच में मंथन किया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं विश्व वायु दिवस आन्दोलन के स्वप्नदृष्टा व सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भूमण्डल की सरकारों ने वायु, जल समेत खाद्यान्नों को मौलिक अधिकार से दूर रखकर उनका अन्धाधुन्ध दोहन, शोषण एवं दुरूपयोग किया है। नतीजन अव्यवस्थित प्राकृतिक असंतुलन कोरोनाकारी बन गया। आगे कहा कि मनमाने प्राकृतिक दोहन, शोषण एवं दुरूपयोग के चलते विराट पुरूष का कण्ठ अवश्य अवरुद्ध हुआ है और उसके प्रतिफल में लौटे अनुष्ठान महाविनाशी कोरोना में तब्दील हो गये। कहा कि फिर भी विश्व की सरकारें मनुस्मृति के धर्माे रक्षति रक्षितः सन्देश को नजरअंदाज कर रही हैं और प्राकृतिक चेतावनी को आतंकी जामा पहनाकर स्थायी सत्ता के फण्डे ईजाद कर रही हैं। कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो भारत में प्राथमिक सुरक्षा के तहत सरकारी राशन पर जरूरी अंगूठे क्यों नहीं रोके गये? और सिर्फ पाँच किलो मुफ्त राशन के लालच में करोड़ों-करोड़ लोगों से अंगूठे लगवाये जाते रहे। इतना कुछ होने के बावजूद गैर जरूरी उपायों के नाम पर पूरा देश सालों-साल बन्द रखा गया। कहा कि अब तो सरकारी अस्पतालों में कैसे भी मर्ज के इलाज में कोरोनाकारी ड्यूपिंग दवा के बहाने दी जाने लगी है ताकि बिगड़े मर्ज की आड़ में जरूरी कोरोना जाँच पाजिटिव पाई जाये और सरकारी आंकड़े मीडिया के सिर आतंक फैला सकें। कहा कि सरकारें संकटों से लाभ उठाना जानती हैं। इसलिए पूरे विश्व में कोरोना के नाम पर गर्म पानी में मछलियां मारी जा रही हैं। और हार्ट, किडनी, आँखों समेत अनमोल बाडी आर्गेन्स का बाजार गर्म हो गया है। कहा कि कोरोना जिनके लिए आफत होगा उनके लिए होगा। मगर अमीरों के लिए तो अन्धे के हाथ बटेर लग गई। और उनकी जिंदगी के चिराग बुझते-बुझते रोशन हो गये। कहा कि कोरोना ने माना कि बेहद जनहानियां की हैं। मगर उसके साथ दबंग-दुर्बल, अमीर-गरीब और हैव्स-हैव नाट्स की खाई उभरकर सामने आई है। और साफ हो गया है कि विश्व दबंगों के हाथ में है। दुर्बलों की जिंदगी जरूरत तक सीमित है। अगर वह नहीं रही तो जिंदगी भी नहीं। कहा कि जैसे सौ साल पहले रौलट कानून के तहत किसी को भी मुल्जिम बनाया जा सकता था। वैसे ही कोरोना आतंक के तहत किसी का भी जीवन छीना जा सकता है।  कहा कि अंग्रेज फिर भी बेहतर थे। कम-से- कम जिंदगी तो नहीं छीन रहे थे। मगर आजादी के 75 साल पहले ही भारत में उसे छीनकर दिखा दिया गया। कहा कि कोरोना के बहाने रेल, हवाई जहाज सभी पर दबंग मौज फरमा रहे हैं और गरीबों से शहर के शहर खाली करवा दिये गये और यह कुतर्क खूब उछाला गया कि दिल्ली से गरीबों के हटने पर  यमुना स्वच्छ हो गई। जबकि हकीकत यह है कि दिल्ली में यमुना गरीबों की बसावट के समय नाला थी और आज भी वह नाला ही है। इस तरह सरकार के घडि़याली आंसू स्वयं प्रकट हो गये और कोरोना अंततः राजनीतिज्ञों के लिए दुधारू गाय साबित हो गया। 

डॉ0 शर्मा ने खुलासा किया कि विराट पुरूष के श्वास वेग से नासिका छिद्र और सूंघने की इच्छा पर नाक उत्पन्न हुई थी। तत्पश्चात् गन्ध फैलाने वाले वायुदेव का प्रादुर्भाव हुआ। आगे कहा कि कोरोना चूंकि वायुदेव द्वारा संचालित है। अतएव वायुदेव की शुद्धि के लिए विश्व वायु दिवस की नितान्त आवश्यकता है। कहा कि हनुमानजी महाराज वायुदेव के पुत्र हैं। अतएव उनके जन्मदिवस पर विश्व वायु दिवस का सूत्रपात किया गया है। कहा कि संस्थान के सौजन्य से प्रति वर्ष विश्व वायु दिवस मनाया जायेगा और पूरे वर्ष वायु तत्व की शुद्धि पर सक्रिय प्रयास जारी रहेंगे। कहा कि दैवीय शक्तियों से अब माँगने के बजाय लौटाने का समय आ गया है। यदि हम वायुदेव की प्रसन्नता के लिए शुद्धि उपाय करेंगे तो उससे विराट पुरूष के साथ हनुमानजी महाराज भी प्रसन्न होंगे। फिर कोरोना और अन्यान्य बीमारियां स्वतः समाप्त हो जायेंगी।

डॉ0 शर्मा ने रोष जताया कि भूमण्डल पर सबसे बड़ा उपद्रव आटोमाबाइल्स की भरमार है। अब लोगों को यह भूल ही गया है कि उनके पैर हैं या फिर कुछ दूर जाने के लिए साइकिल है। बस बाइक निकालो किक लगाओ और देश काल पर विजय जताओ। आगे कहा कि आटो चालक को इससे क्या प्रयोजन कि ध्वनि और वायु प्रदूषण से दिल्ली, बंबई, कोलकाता और चेन्नई के नौनिहाल पैदा होते ही दमा के शिकार हो रहे हैं। धीरे-धीरे बाकी शहर भी वायु प्रदूषण की चपेट में दुर्गति के कगार पर पहुँचते जा रहे हैं। कहा कि मल-मूत्र कूड़ा करकट निस्तारण के लिए नगर निगम के बजाय आत्म निर्भर होने की जरूरत है। यदि सामर्थ्य है तो मकान के साथ अतिरिक्त भूमि पर पुनर्चक्रीय निस्तारण प्रकल्प वायु को स्वच्छ और स्वस्थ बनाये रखने में मददगार सिद्ध होंगे। कहा कि विद्युत के लिए सौर यन्त्र, दैनिक उपयोग में आर्गेनिक सौन्दर्य प्रसाधन स्थानीय परिवेश को शुद्धता प्रदान करते हैं। रात्रि में देशी गाय के घी का एक दीपक कई टन आक्सीजन देकर वातावरण शुद्ध रखता है। 

डॉ0 शर्मा ने विश्व वायु दिवस आन्दोलन के लिए वृन्दावन स्थित केशीघाट को सर्वाधिक उपयुक्त स्थल बताया। कहा कि जिस स्थान पर केशी राक्षस का खात्मा किया गया था। प्रदूषण विनाश के लिए उससे उपयुक्त दूसरा स्थल हो नहीं सकता। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सन्देश को जीने का समय आ गया है। कलियुग में प्रकारान्तर से यही सर्वश्रेष्ठ भक्तियोग है।

डॉ0 शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र संघ से हनुमान जयन्ती को विश्व वायु दिवस घोषित करने की माँग की। कहा कि जयन्ती का देश-काल बीमारियों के उतार- चढ़ाव का भी संवाहक है। अतएव यदि जयन्ती पूर्व और पश्चात् के समय वायु शुद्धि की सजगता बरती जाये तो तमाम बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। कहा कि अतीत में वायुदेव और हनुमान जयन्तियां प्राकृतिक परिवेश की शुद्धता के लिए मनाई जाती रही होंगी किन्तु कालान्तर में अष्ट सिद्धि और नवनिधि के लोभ में धर्म का मूल संकुचित होता गया। नतीजन समृद्धि के साथ प्रकोप भी बढ़ते गये।

डॉ0 शर्मा ने सवाल उठाया कि सिर्फ मांसाहार और मद्यनिषेध से कोई तीर्थ पवित्र नहीं हो जाता है। तीर्थ स्थल की मौलिक पवित्रता शुद्ध वायु में निहित है। कहा कि वृन्दावन में हजारों टन वायु सिर्फ इसलिए प्रदूषित हो रही है क्योंकि धूम्रपान पर कोई प्रतिबंध नहीं है और लोग हैं कि पूरे परिक्रमा मार्ग पर मोर्चा जमाये बैठे हैं जहां उनके जागने और सोने के बीच धूम्रपान की धौंकनी चलती ही रहती है। फिर तीर्थ भला कैसे पवित्र रह सकेगा?

इससे पूर्व उपस्थितों ने हनुमानजी महाराज के चित्रपट पर पुष्पार्चन से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल केशिनिषूदन भगवान  श्रीकृष्ण एवं माँ यमुना के जयकारों समेत ‘वायु शुद्ध बनायेंगे, कोरोना तुम्हें भगायेंगे’ ‘विश्व होगा कब खुशहाल, जब वायु धन से होगा मालामाल’ नारों से गूँज उठा।

इस अवसर पर गिरधरदास, विनोदानन्द मिश्रा, सीताराम निषाद, विक्रम उपस्थित थे।   

Comments