जवाहरबाग
नृशंस नरसंहार लोकतंत्र समेत मानवता पर कलंक - डॉ0 शर्मा
पाँचवीं
वर्षगांठ पर हताहतों का स्मरण
स्मारक
निर्माण पर प्रधानमंत्री को आभार
मथुरा,
रामराज्य की स्थापना में महात्मा गांधी महात्मा गांधी के सर्वस्व न्यौछावर के बावजूद आजादी के 69 वर्षाें बाद जखनबाग और जलियांवालाबाग की लीक पर 2 जून 2016 को मथुरा में दोहराया गया जवाहरबाग नृशंस नरसंहार लोकतंत्र ही नहीं बल्कि मानवता पर भी कलंक है।
इस उद्गार
के साथ जवाहरबाग नृशंस नरसंहार की पाँचवीं वर्षगांठ पर 2 जून बुधवार को डॉ0 रमेश चन्द्र
शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में परिकल्पित एवं नृशंस नरसंहार क्षेत्र
में मूर्तित लोकतंत्र मानवतारक्षक स्मारक प्रांगण में मंथन किया गया।
संस्थान
के संस्थापक अध्यक्ष एवं लोकतंत्र मानवतारक्षक स्मारक के स्वप्नदृष्टा व सूत्रधार डॉ0
सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि हादसे के जिम्मेदार चार स्तम्भों में मूर्तित
स्मारक लोकतंत्र को तो व्याख्यायित करता है। मगर उसमें मानवता का क्रंदन कहीं भी नजर
नहीं आता है। आगे कहा कि स्मारक के लिए आबंटित कम भूमि और अल्प ऊँचाई घटना के अंतरराष्ट्रीय
मानक की उपेक्षा कर रही है। कहा कि स्मारक की वैश्विक प्रस्थापना तभी होगी जब उसे कार्ल
माकर््स और लिबर्टी की मूर्तियों जैसा स्वरूप प्रदान किया जायेगा। कहा कि जवाहरबाग
स्मारक विश्व इतिहास में जखनबाग और जलियांवाला से भी ऊँचा स्थान पायेगा। कारण कि अतीत
के भारतीय नरसंहार गुलामी के दौर में हुए थे। जबकि जवाहरबाग नरसंहार देश में लोकतांत्रिक
व्यवस्था के बावजूद घटने दिया गया।
डॉ0
शर्मा ने देश की मौजूदा हालत में संसदीय कार्यप्रणाली की भूमिका पर रोष जताया। कहा
कि वोट बैंक में उलझती केन्द्र एवं राज्य सरकारों की रस्साकशी के चलते 2 नवम्बर
1990 को अयोध्या का बाबरी विवाद क्षेत्र लाशों से पाट दिया गया था। मगर लचर संसदीय
कार्यप्रणाली ने उस वक्त भी सूबे में आपातकाल नहीं लगने दिया। आगे कहा कि विधायिका
कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच पारदर्शिता के अभाव ने उग्रवाद को पनपने दिया जिसके
चलते देश अराजकता के दलदल में धंसता चला गया। कहा कि इन्दिरा युग के अवसान के साथ ही
देश में प्रजातंत्र का सूर्य अस्त हो गया और आदमखोरी का शिकंजा आइस्ता-आइस्ता कसता
गया जो अब कोरोना के बहाने दबंगों के लिए छिनते दुर्बलों के हार्ट, किडनी और आँखों
से नजर आ रहा है। कहा कि नृशंस संहार की तर्ज पर स्मारक स्थापना में भी पारदर्शिता
नहीं बरती गई। न तो प्रधान मंत्री कार्यालय ने स्मारक स्थापना पर सौंपे गये ज्ञापन
का जवाब दिया और न ही स्थानीय प्रशासन ने उसकी भनक लगने दी। यहाँ तक कि स्थानीय मीडिया
ने भी वर्ष 2018 नई दिल्ली में आयोजित स्मारक प्रदर्शन पर खबर प्रकाशित की ।
डॉ0
शर्मा ने नृशंस नरसंहार में मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाया। कहा कि मीडिया ने घटना
के उलझावों को आंधी की हवा दी। मगर लोकतंत्र में शुमार जिम्मेदारी के बावजूद उससे पक्षपाती
पत्रकारिता के राष्ट्रीय एवम् अन्तरराष्ट्रीय दुष्प्रभावों पर विचार करते नहीं बना।
नतीजन राजनीति के पत्तों पर टिका रंगमंच लापरवाही में एकाएक हिंसात्मक हो गया। फिर
भी पत्रकारिता ने लीक से हटने का नाम नहीं लिया और दुर्भाग्य से विभाजनकारी लेखन आज
भी दोहराया जा रहा है। यह तो प्रधान मंत्री की दूरदर्शिता थी जिसने संस्थान द्वारा
प्रस्तुत ज्ञापन का महत्व समझा और उसे मूर्तरूप प्रदान किया।
डॉ0
शर्मा ने नरसंहार पर राजनीतिक बयानबाजी समेत अभूतपूर्व मौन पर रोष जताया। कहा कि विपक्ष
के खुले आरोपों से राजनीतिक रंगमंच गर्म जरूर हुआ। किन्तु वे जनता का विश्वास जीतने
में नाकामयाब रहे। फलतः उससे कोई आन्दोलन जन्म नहीं ले सका। रही बात सक्षम दलों की
तो हादसे पर उनसे मुँह तक नहीं खोला गया। नतीजन विपक्ष भगवान भरोसे सत्ता सुख का सपना
देखता रहा और सत्तासीन दल कमजोर होने के बजाय मजबूत होता गया।
इससे
पूर्व उपस्थितों ने भारतमाता समेत लोकतंत्र व मानवता के जयकारों से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात् आयोजन स्थल ‘संवेदना
के जब दौड़ेंगे दूत, लोकतंत्र होगा मजबूत’ ‘तड़प-तड़प मर जायेंगे, मावनता जरूर बचायेंगे’
‘लोकतंत्र की कालिख के अमिट रहेंगे दो नम्बर, 2जूनी जवाहरबाग और बाबरिआई खूनी 2नवम्बर’।
इस अवसर
पर कैलाश वर्मा, राकेश उपस्थित थे।





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