गांधी बलिदान वैश्विक कालखण्ड विभाजक-डॉ0 शर्मा

 


74वें बलिदान दिवस के दिन गांधी संवत्सर पर आयोजन

मान्यता हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ से अपील

मथुरा,

 


वैश्विक कालखण्ड विभाजक ईसा मसीह माना कि आज विश्व की पवित्रतम आत्माओं के सर्वाेच्च शिखर पर बिठाये गये हैं। मगर जीसस अपने जीवनकाल में रोम से बाहर नहीं निकल सके। किन्तु विश्ववंद्य विश्वात्मा महात्मा गांधी अपने अपौरूषेय व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बल चन्द देशों की सीमित यात्रा के बावजूद संपूर्ण विश्व में पूजे गये और उनके द्वारा प्रस्थापित दर्शन आज भी विश्व में प्रासंगिक माना जा रहा है। फिर क्या वजह है कि महात्मा गांधी का बलिदान 74वें वर्षाें के लम्बे अन्तराल तक वैश्विक कालखण्ड विभाजक नहीं बनाया गया।



यह सवाल महात्मा गांधी के 74वें बलिदान दिवस पर डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान मेंगांधी संवत्सर के शुभारम्भ पर रविवार को गांधी पार्क क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में उठाया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं गांधी संवत्सर के स्वप्नदृष्टा सूत्रधार डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि भारत में महात्मा गांधी को 74 वर्षाेंतक भुनाया तो खूब गया है। मगर उनके द्वारा प्रतिपादित दर्शन के अनुसार तो राष्ट्र का संचालन किया गया और ही उन्हें उचित स्थान देने और दिलाने के लिए प्रयास किया गया। आगे कहा कि मौजूदा सरकार की हरफनमौला परियोजनाओं में गांधी चिंतन को चमकाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी गई। किन्तु भारतीय विभूतियों की वैश्विक प्रस्थापना के सवाल पर सरदार वल्लभभाई पटेल को बलात हस्तक्षेपी विश्ववंद्य बनाने का दुष्प्रयास किया गया। कहा कि अगर भविष्य में यही रवैया रहा तो जैसे भगवान बुद्ध को बुद्धत्व के प्रचार-प्रसार के लिए भारत की सीमाओं को लांघने के लिए मजबूर होना पड़ा। वैसे ही देर-अबेर गांधी देशना भारतीय हक से छिनकर विश्ववाणी में रूपान्तरित हो जायेगी और उसकी अनुगूंज चार्वाकी शोर-शराबे में अनसुनी हो जायेगी। आगे कहा कहा कि इंग्लैंड में 40 साल पहले एटनबरो का गांधी फिल्मांकन भारतीय हक से छिना विरासती मसला था। मथुरा में उनकी पहली भारतीय गिरफ्तारी और वस्त्रत्याग विश्वात्मा की राष्ट्रीय एवं वैश्विक घटनाओं से जुड़ी स्मृतियों के अवशेष हैं जिन्हें सरकारों ने संजोने का प्रयास नहीं किया। कहा कि यदि गांधी तत्व विश्वव्यापी नहीं बनाया गया तो जैसे भारत से बौद्ध धर्म का अन्त हो गया। वैसे ही गांधी देशना भारत में दम तोड़ देगी। फिर दुनिया के कुछ निशां बुद्ध के ढाई हजार वर्ष बाद विश्व की तीसरी पवित्रतम आत्मा के भारत में होने की गवाही देंगे।



समापन पर डॉ0 शर्मा ने भारत सरकार समेत संयुक्त राष्ट्र संघ से गांधी कालखण्ड विभाजक परियोजना घोषित करने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रस्ताव पर अमल नहीं किया तो उसके खिलाफ आन्दोलन चलाया जायेगा। 



इससे पूर्व उपस्थितों ने भारत माता एवं महात्मा गांधी के जयकारों से आयोजन की शुरूआत की। तत्पश्चात आयोजन स्थल ^महात्मा गांधी अमर रहें जब तक सूरज चांद रहेगा महात्मा गांधी का नाम रहेगा नारों से गूंज उठा।

इस अवसर पर ओंकार स्वामी, योगेश, रजनी, संजय, योगेश शर्मा, संजय चौधरी, पवन, कन्हैया, अनूप चौधरी, गिरिराज तोमर, कन्हैयालाल आदि उपस्थित थे।


गांधी बलिदान वैश्विक कालखण्ड विभाजक-डॉ0 शर्मा

https://studio.youtube.com/video/odnqG97S9Pg/edit


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