नृशंस नरसंहारक मातमी स्थली में धार्मिक जश्न पर रोष
बलात हस्तक्षेपी आयोजन से कृष्णत्व कलंकित
मथुरा,
मासूमों की चीख पुकारें, अबलाओं का करूण क्रन्दन, दुर्बल वृद्धों की करूण चीत्कार के बावजूद दोषियों समेत सैकड़ों बेगुनाहों के 2जूनी नृशंस नरसंहार पर निर्मित जवाहरबाग स्मारक स्थली में महारास के चलते न केवल लोकतंत्र समेत मानवता बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का कृष्णत्व भी कलंकित हुआ है।
यह आरोप डॉ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में जवाहरबाग नृशंस नरसंहार स्थली में सूबे के मुखिया की मौजूदगी में अगहन पूर्णिमा वर्ष 2022 की रात मंगलवार के दिन मथुरा संसदीय क्षेत्र की अदाकारा सांसद की भूमिका में प्रायोजित महारास के विरोध में बुधवार को जारी विज्ञप्ति में लगाया गया।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं जवाहरबाग नृशंस नरसंहार स्थली में लोकतंत्र मानवता रक्षक स्मारक के स्वप्नदृष्टा व प्रेरक याची डॉ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने प्रतिवाद में कहा कि प्रथमतः तो केन्द्र समेत राज्य सरकार ने संस्थान के बैनर तले जवाहरबाग नृशंस नरसंहार क्षेत्र में लोकतंत्र मानवता रक्षक स्मारक की मांग को लेकर नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर क्षेत्र में आयोजित धरना-प्रदर्शन के फलस्वरूप स्वीकृत प्रस्ताव की सूचना नहीं दी। दूसरे 17वीं लोकसभा के दौरान उत्तर प्रदेश में घोषित विधान सभाई चुनाव में मथुरा- वृन्दावन विधान सभा क्षेत्र के तथाकथित भाजपा प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान जवाहरबाग स्मारक निर्माण का श्रेय अपने माथे चढ़ा डाला। और ऊपर से अभी जबकि निर्मित स्मारक के अधूरेपन पर सवाल उठाया जा रहा था और उपेक्षित मानवता को स्मारक का अंग बनाये जाने पर जोर दिया जा रहा था। उसी बीच नृशंस नरसंहार स्थली में महारास के बलात हस्तक्षेपी आयोजन से स्मारक का मकसद चकनाचूर हुआ है। आगे कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानवतावादी मुल्क में आजादी के बाद घटित नृशंस नरसंहार अपने आप में बेमिसाल है। लिहाजा मथुरा के जवाहरबाग नृशंस नरसंहार पर पूरे भूमण्डल में बहस होगी ताकि पृथ्वी के हर कोने तक भारतीय लोकतंत्र की आड़ में मानवता पर बरपाये जा रहे अमानुषिक अत्याचारों का पर्दाफाश हो सके। कहा कि मौजूदा दौर जिन अलगाववादी हथकण्डों से भारत को विश्व समेत गृह युद्ध में झोंका जा रहा है। उससे भारत समेत पृथ्वी की समस्त मनुष्य जाति पर खतरा मंडराने लगा है। यदि समय रहते नापाक इरादों पर लगाम नहीं कसी गई तो वह दिन दूर नहीं जब अगला हिरोशिमा और नागासाकी भारत पर दोहराया जायेगा।
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