अमृत महोत्सव नहीं दे सका ब्रज संघर्ष को इंसाफ-डाॅ0 शर्मा

महोत्सव के बावजूद उपेक्षित ब्रज के स्वाधीनता अमृत पर रोष

जिला प्रशासन समेत अकर्मण्य संस्थाओं पर सवाल

मथुरा,

समुद्र मंथन के अमृत का बंटवारा सत्यमेव जयते का डंका आज भी बजा रहा है। मगर महोत्सव के बावजूद 165 वर्षाें से उपेक्षित स्वाधीनता संघर्ष की नाइंसाफी पर ब्रज आज सवाल उठा रहा है।

आजादी के अमृत बंटवारे पर डाॅ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध एवं सेवा संस्थान के तत्वावधान में महोत्सव वर्ष 2022 के समापन पर सवाल उठाया गया।

संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं ब्रज के स्वाधीनता आन्दोलन के पुनर्खोजी डाॅ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि मातृभूमि के समर्पित सेवकों के अभाव में ब्रज आजादी का समुचित लाभ नहीं उठा पाया है। वरना कोई वजह नहीं थी कि 148 वर्ष पूर्व संग्रहालय की शक्ल में जगी सांस्कृतिक जागरण की अलख आजाद भारत के अमृत बंटवारे पर मौन रही होती। आगे कहा कि यह समर्पण का ही अभाव है कि आकाशवाणी, दूरदर्शन समेत शोध संस्थायें हर साल करोड़ों का जनधन बरबाद कर रही हैं। किन्तु उनसे सामाजिक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का बोझ वहन  नहीं हो पा रहा है। नतीजन राष्ट्रीय स्वाधीनता आन्दोलन की हर धड़कन पर तस्दीक ब्रज का दुर्लभ बलिदान अमृत महोत्सव के आते-आते गुमनामी में दफन हो गया। और पीएचसी बर्लटन, सेठ लखमीचन्द, देवकरन, देवीसिंह के दास्तान नौहझील, गोखरौली, छाता सराय के मौन साक्ष्य आजाद भारत में बेजुबाँ ही रह गये। इतना जरूर हुआ कि पंजाब का स्वातंत्र्य द्रोह बलिदान में रूपान्तरित किया गया।    

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